ईटीएफ और म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है और दोनों में क्या टैक्स और चार्ज हैं

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 ETF (Exchange Traded Fund) और म्यूचुअल फंड दोनों ही निवेश के लोकप्रिय माध्यम हैं, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। यहाँ दोनों के बीच का अंतर और उनके टैक्स और चार्जेज के बारे में जानकारी दी गई है:

ETF और म्यूचुअल फंड में अंतर:

  1. ट्रेडिंग:

    • ETF: ETF स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह ट्रेड होते हैं। इन्हें दिन भर खरीदा और बेचा जा सकता है।
    • म्यूचुअल फंड: म्यूचुअल फंड यूनिट्स NAV (Net Asset Value) के आधार पर दिन के अंत में खरीदी और बेची जाती हैं।
  2. प्रबंधन:

    • ETF: आमतौर पर पैसिवली मैनेज होते हैं और इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।
    • म्यूचुअल फंड: ये एक्टिवली या पैसिवली मैनेज हो सकते हैं। एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स में फंड मैनेजर सक्रिय रूप से स्टॉक्स चुनते हैं।
  3. लिक्विडिटी:

    • ETF: अधिक लिक्विड होते हैं क्योंकि इन्हें स्टॉक मार्केट में किसी भी समय ट्रेड किया जा सकता है।
    • म्यूचुअल फंड: कम लिक्विड होते हैं क्योंकि इन्हें केवल दिन के अंत में खरीदा और बेचा जा सकता है।
  4. मिनिमम निवेश:

    • ETF: 1 यूनिट (एक शेयर) से निवेश शुरू कर सकते हैं।
    • म्यूचुअल फंड: SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए न्यूनतम राशि निवेश कर सकते हैं (आमतौर पर ₹500 या ₹1000)।
  5. चार्जेज:

    • ETF: आमतौर पर कम एक्सपेंस रेशियो होता है, लेकिन ट्रेडिंग के समय ब्रोकरेज चार्ज और अन्य ट्रांजैक्शन फीस होती है।
    • म्यूचुअल फंड: एक्सपेंस रेशियो अधिक होता है, जो फंड के प्रबंधन के लिए लिया जाता है। इसके अलावा, एंट्री और एग्जिट लोड भी हो सकता है।

टैक्स और चार्जेज:

  1. ETF:

    • कैपिटल गेन टैक्स:
      • शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर ETF को 1 साल से कम समय के लिए होल्ड किया गया है, तो 15% टैक्स।
      • लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर ETF को 1 साल से ज्यादा समय के लिए होल्ड किया गया है, तो 1 लाख रुपए तक के गेन पर टैक्स फ्री और उसके ऊपर 10% टैक्स।
    • डिविडेंड टैक्स: डिविडेंड पर 10% का टैक्स (अगर डिविडेंड 5000 रुपए से अधिक है)।
    • चार्जेज: ब्रोकरेज चार्ज, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), अन्य ट्रांजैक्शन फीस।
  2. म्यूचुअल फंड:

    • कैपिटल गेन टैक्स:
      • शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर इक्विटी म्यूचुअल फंड को 1 साल से कम समय के लिए होल्ड किया गया है, तो 15% टैक्स।
      • लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर इक्विटी म्यूचुअल फंड को 1 साल से ज्यादा समय के लिए होल्ड किया गया है, तो 1 लाख रुपए तक के गेन पर टैक्स फ्री और उसके ऊपर 10% टैक्स।
    • डिविडेंड टैक्स: डिविडेंड पर 10% का टैक्स (अगर डिविडेंड 5000 रुपए से अधिक है)।
    • चार्जेज: एक्सपेंस रेशियो (1-2% के बीच), एंट्री लोड (कुछ फंड्स में), एग्जिट लोड (कुछ फंड्स में अगर यूनिट्स को एक निर्धारित समय सीमा से पहले बेचा जाता है)।

सारांश:

  • ETF: स्टॉक की तरह ट्रेड होते हैं, कम एक्सपेंस रेशियो, उच्च लिक्विडिटी, लेकिन ब्रोकरेज चार्जेज और अन्य ट्रांजैक्शन फीस।
  • म्यूचुअल फंड: एक्टिव और पैसिव दोनों हो सकते हैं, एक्सपेंस रेशियो अधिक, कम लिक्विडिटी, एंट्री और एग्जिट लोड संभावित।

निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश की अवधि और जोखिम सहनशीलता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। यदि आवश्यक हो, तो किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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